बाबा बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी द्वारा निकाली गई "सनातन एकता पदयात्रा" वर्तमान समय में हिंदू समाज को एक नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। यह यात्रा न केवल सनातन धर्म के अनुयायियों को उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है, बल्कि जातीय भेदभाव और वर्गीय खाई को पाटने का भी माध्यम बन रही है। लाखों लोगों की सक्रिय भागीदारी और संतों, राजनेताओं, तथा सामाजिक संगठनों का समर्थन यह दिखाता है कि यह अभियान जनमानस में गहरी छाप छोड़ रहा है।
धीरेन्द्र शास्त्री जी की इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि यह हिंदू समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा जैसे आंतरिक भेदों से ऊपर उठाकर एक व्यापक एकता के सूत्र में पिरो रही है। यह हिंदू धर्म को न केवल एक धार्मिक पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रही है, बल्कि इसे एक सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी स्थापित कर रही है। जब समाज संगठित होगा, तो यह धर्मांतरण, तुष्टीकरण की राजनीति, और सांप्रदायिक अलगाववाद जैसे खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकेगा।
इसका लाभ सनातन धर्म के जागरण में स्पष्ट रूप से देखा जाएगा। यह यात्रा नई पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व महसूस करने के लिए प्रेरित करेगी। हिंदू समाज में सहिष्णुता, करुणा और समानता जैसे मूलभूत सिद्धांत फिर से स्थापित होंगे, जिससे एक समरस समाज की नींव मजबूत होगी। इस यात्रा के माध्यम से समाज को यह संदेश मिल रहा है कि धर्म केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली और मानवता के कल्याण का मार्ग है।
दूसरी ओर, इस यात्रा का प्रभाव वामपंथी और हिंदू विरोधी विचारधाराओं पर भी पड़ेगा। जो लोग वर्षों से जातिवाद और सामाजिक बंटवारे को हवा देकर हिंदू समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे, उनके लिए यह यात्रा एक बड़ा झटका साबित होगी। जब हिंदू समाज संगठित होगा और अपनी आंतरिक कमजोरियों को दूर करेगा, तो उनकी "फूट डालो और राज करो" की रणनीति अप्रभावी हो जाएगी। वामपंथी और तथाकथित प्रगतिशील लोग, जो सनातन धर्म को "अवैज्ञानिक" या "पिछड़ा" बताकर इसका विरोध करते रहे हैं, वे अपनी प्रासंगिकता खो देंगे।
सेकुलरवाद के नाम पर तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले समूहों को भी बड़ा नुकसान होगा। इस यात्रा के जरिए समाज में बढ़ती जागरूकता धर्मांतरण के प्रयासों को रोकने में मदद करेगी, जो अक्सर हिंदू विरोधी एजेंडे का हिस्सा होता है। जब हिंदू समाज एकजुट होकर अपनी पहचान और अधिकारों के लिए खड़ा होगा, तो वे राजनीतिक और सामाजिक संतुलन में अपने पुराने प्रभाव को बनाए रखने में विफल रहेंगे।
इस यात्रा का दूरगामी प्रभाव यह होगा कि हिंदू समाज न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सशक्त पहचान के रूप में उभरेगा। यह अभियान न केवल धर्म की रक्षा करेगा, बल्कि इसे आधुनिक समय में प्रासंगिक बनाते हुए समाज के हर वर्ग को जोड़ने का माध्यम बनेगा। धीरेन्द्र शास्त्री जी की यह सोच कि हिंदू समाज को एक ऐसी ताकत के रूप में खड़ा किया जाए, जो अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक हो, आने वाले समय में हिंदू धर्म के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत कर सकती है।
महेंद्र सिंह भदौरिया (सामाजिक कार्यकर्ता)
प्रांत सेवा टोली सदस्य
विश्व हिन्दू परिषद उत्तर गुजरात
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