वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करें तो यह कहा जा सकता है इस्लाम और वामपंथ का गठजोड़ भारत को बहुत बड़े खतरे की ओर ले जा रहा, जिसकी परिणति सिर्फ हिन्दू-विहीन भारत होगा। क्योंकि इस देश के राजनीतिक वर्ग को आज तक समझ नहीं आया कि राष्ट्र धर्म सनातन है। सनातन धर्म के बिना भारत के अस्तित्व की कल्पना करना संभव नहीं है। सनातन धर्म का उत्थान होगा तो भारत का उत्थान होगा, सनातन की अवनति होगी तो भारत की अवनति होगी।
इन परिस्थितियों का विश्लेषण करें तो पाएंगे, भारत और वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व के क्रियाकलापों के विश्लेषण करेंगे, इनमें हिंदू बोध कूट-कूटकर भरा, लेकिन शत्रु बोध नहीं है। जिसके कारण सामने खड़ा खतरा भी नहीं दिख रहा। संभल में जिहादियों द्वारा किया गया उपद्रव और यह जानते हुए उत्तर प्रदेश में योगी सरकार फिर भी उन्होंने साहस किया। उसके बाद उनके साथ पूरा जिहादी इस्लामी और वामी तथाकथित राष्ट्रवादी खड़े हो गए। हर मंदिर में शिवलिंग खोजना कहाँ तक उचित है? कुछ पूजा स्थल अधिनियम का हवाला देने लगे और कहने लगे राम मंदिर के बाद मंदिर-मस्जिद का विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। माननीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के वक्तव्य उदाहरण देते हुए एक बड़े न्यूज चैनल के पत्रकार रजत शर्मा कहने लग गए कि हर मस्जिद में शिवलिंग ढूंढ़ना कहाँ तक उचित है।
एक सूचना प्रसारण मंत्रालय में सलाहकार के पद में हैं। भारत में कोई शाही मस्जिद नहीं है। भारत में लोकतंत्र है। पुरानी बातों को भूलना ही बेहतर है। वामपंथी अलग राग अलाप रहे कि कह रहे इस देश में 1947 की यथास्थिति बनाई जाए। हर स्तर पर यह भरसक प्रयास किया जा रहा कि हिंदू अपने हजार वर्ष के जख्म को भूल जाए। इस सभ्यता की लड़ाई को यहीं पर छोड़ दे। इस्लामिक जिहादियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दे। अपने हाथों यह देश जिहादियों हवाले कर दिया जाए।
1947 से 2024 में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। 1947 में भारत का विभाजन मजहब के आधार पर हुआ था। लेकिन पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र बन गया। लेकिन भारत आज तक हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सका। उस वक्त नेतृत्व हिंदू राष्ट्र परिकल्पना को पागलपन कहती थी। इसी कारण आबादी स्थानांतरण भी नहीं कराया गया। जिन लोगों ने भारत के विभाजन के लिए वोट किया था वो पाकिस्तान नहीं गए। उसके बाद इस देश की सरकारों ने कोई सीख नहीं ली है। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारत के संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द डाल दिया गया। जिसके बाद इस देश की सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसी संस्था बनाई। मुस्लिमों को विशेषाधिकार दिया गया। उसके पहले से 1938 का शरीयत एक्ट चल ही रहा था। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बनाकर मुस्लिम को और अधिकार दे दिया। यहाँ तक इस देश में हिंदुओं की जमीन, जो पाकिस्तान में ज्यादातर थी, उसकी किसी को चिंता नहीं हुई। पाकिस्तान के जिहादियों ने हिंदुओं की जमीन पर कब्जा कर लिया। लेकिन इस देश में जिहादियों की जमीन के संरक्षण के लिए वक्फ बोर्ड एक्ट बनाया गया।
2013 में वक्फ बोर्ड को इतना मजबूत बना दिया गया कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन पर दावा कर सकता है। वक्फ बोर्ड द्वारा किया गया दावा किसी न्यायिक समीक्षा दायरे में नहीं आता है। यहाँ तक जब राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ, उसके बाद हिंदू समाज ने मांग रखी थी। जैसे पांडवों ने पाँच गाँव मांगे थे लेकिन दुर्योधन ने नहीं माना था। उसी प्रकार हिंदुओं ने मुस्लिम पक्ष से तीन मंदिर मांगे थे - अयोध्या, मथुरा और काशी। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने उनकी मांग ठुकरा दी।
मुस्लिम तुष्टिकरण में अंधी सरकार ने 1991 पूजा स्थल अधिनियम कानून लाकर, अयोध्या को अपवाद मानकर यह तय कर दिया कि 1947 के बाद जितने स्थल जिस स्वरूप में रहेंगे, उन्हें उसी स्वरूप में रखा जाएगा। उन मामलों में कोर्ट जाने का कोई अधिकार नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि इस देश की सरकारों ने हिंदुओं के घाव पर नमक छिड़कने के अलावा कुछ नहीं किया है।
इतिहास लेखन से लेकर वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो एक बात पाएंगे कि इस देश के हिंदू जनमानस के मन से शत्रु बोध खत्म करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया गया। हिंदू समाज हजार वर्षों के अत्याचारों को भूल जाए, इसके लिए मुगलों और हिंदू प्रतीकों का इतिहास लेखन में मजाक उड़ाया गया। मुगलों और विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन किया गया। यहाँ तक आर्य आक्रमण सिद्धांत जैसे सिद्धांत प्रतिपादित किए गए। आर्य बनाम मूल निवासी की पहचान क्रिएट की गई।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि हिंदू अपने इतिहास पर गर्व करने के बजाय अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म के लिए हीनता बोध से ग्रस्त हो जाए। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया गया। हिंदू समाज कभी शत्रु और मित्र के बीच अंतर नहीं कर पाए, इसलिए विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन किया गया। आर्यों को विदेशी बताकर यह सिद्ध करने का प्रयास हुआ कि भारत में कोई मूल निवासी नहीं है। भारत के लोगों और सभ्यता को विदेशियों ने बनाया है। भारत की संस्कृति और सभ्यता सबकुछ विदेशी है।
यह सिद्ध करने में बहुत हद तक सफल हो गए, लेकिन इन्हें यह नहीं पता था कि किताबों से इतिहास को मिटा सकते हैं, लेकिन सच को दबा नहीं सकते। हिंदू सभ्यता उठ खड़ी होने लगी। उसने अपने ऊपर हुए हजार वर्षों के अत्याचारों का हिसाब-किताब मांगना शुरू कर दिया। इसके लिए संघर्षरत रही। बाबरी विध्वंस हो या राम मंदिर निर्माण हो, यह सब इस देश के हिंदुओं ने अपना पौरुष दिखाया। अपना अधिकार लेने का प्रयास किया।
इससे विचलित कुछ शक्तियाँ हो गईं और कहने लगीं कि इतिहास में हुई घटनाओं को भूल जाना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। इन्हें इतना भी पता नहीं है कि इतिहास से भविष्य का निर्माण होता है। इन्हें यहूदियों के संघर्ष की कथा याद नहीं है। यहूदियों को उनके मूल स्थान से 3 हजार वर्ष पूर्व हटा दिया गया था। फिर भी यहूदियों ने एक संकल्प लिया था - "हम एक दिन येरूशलम में मिलेंगे।"
इस बात को 3000 वर्ष तक दोहराते रहे। कई पीढ़ियाँ बीत गईं, फिर भी दोहराते रहे। आज यहूदियों का अपना देश है। इसलिए इतिहास बोध का महत्व इससे स्पष्ट होता है।
भारत वर्तमान परिस्थितियों को देखें और जिस तरह इस्लामी और वामपंथी तंत्र के गठजोड़ के कारण जो परिस्थितियाँ निर्मित हो रही हैं। हर जिहादी घटना के समर्थन में पूरा तंत्र खड़ा हो जाता है। जिहादी उपद्रव, दंगे, हत्या, बलात्कार - कुछ भी करें, फिर भी इनके साथ पूरा तंत्र खड़ा मिलेगा। भारत की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लग रहा है कि बचा हुआ भू-भाग भी बचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। गलती से सरकार बदलती है, तो इस देश को गृहयुद्ध में झोंक दिया जाएगा।
इन लोगों को संरक्षण में पूरा वामपंथी तंत्र आ जाएगा। कह दिया जाएगा कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रही थी। उसकी प्रतिक्रिया में सब हो रहा है। इसे जस्टिफाई कर दिया जाएगा। जैसे मोपला में हुए हिंदुओं के नरसंहार को कृषकों का जमींदारों के विरुद्ध विद्रोह बताकर जस्टिफाई किया गया था। उसी तरह भविष्य में इस्लामिक जिहाद जस्टिफाई यह कहकर किया जाएगा कि मोदी सरकार से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है, जो सही है। हिंदू अपने अधिकार की बात करे तो पूरा तंत्र हिंदुओं के विरुद्ध मिलेगा।
यहाँ तक कि हिंदू आत्मग्लानि से भर जाएंगे। अपने अपनों के विरुद्ध खड़े हो जाएंगे। इस लोकसभा चुनाव और उसके बाद कई घटनाओं में हमने देखा है।
दीपक कुमार द्विवेदी
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