मेरे प्रिय भारतवासियों,
जय श्री राम।
राम नाम में है परम धाम।
मैं भी राम जी के आगमन में पूजा करूँगी। परिवार के साथ करूँगी। अपने गाँव में जाकर दीपक प्रज्वलित करूँगी। यह एक महत्वपूर्ण दिन है और दुर्लभ सौभाग्य मिला है। स्वयं राम आएँगे और दीपक से उनका स्वागत होगा। हम बहुत ही सौभाग्यशाली हैं और शायद हमारे माता-पिता के कर्म और पूजा का अमृत है, जो हमें यह अद्भुत, अनूठा, अलौकिक, अनोखा और अलभ्य अवसर प्राप्त हुआ कि हम उस विराट और शाश्वत दिव्य दर्शन के भागी बन पाएँ।
मेरा नाम डॉक्टर शिप्रा श्रीवास्तव है। मैं और मेरे पति डॉक्टर संदीप श्रीवास्तव हार्ट के सर्जन हैं, इंदौर में। हमने निश्चय किया कि इस पावन और पवित्र दिन में क्यों न हम अपने गाँव में जाकर भगवान राम को समर्पित करें। अपने बुजुर्गों और अपने कुलदेवी के स्थान पर भक्ति से राम की आराधना करें।
यह मेरी संस्कृति है, मेरे संस्कार हैं, मेरे पूर्वजों की भक्ति है, मेरा आचरण है और मेरा अस्तित्व है, जिसमें राम का ही नाम लिखा हुआ है। मैं यहाँ कोई भी आस्था या धर्म की बात नहीं कहूँगी। मैं केवल विज्ञान, ज्ञान और शाश्वत की बात कहूँगी जो सबका है और किसी का व्यक्तिगत नहीं है। आज के नवजवानों को बताना चाहूँगी कि राम की पूजा और भक्ति में सिर्फ़ शिक्षा, जीवन का सार और क्षितिज की विद्या का अनंत समावेश है।
राम भक्ति क्या सिखाती है, इसका पूर्ण विश्लेषण तो मानवजाति के लिए असंभव है। चलिए, मैं इस अथाह सागर में कुछ बूँदों का प्रयास करती हूँ।
1. राम ने हमें माता-पिता का आदर, आज्ञा और सेवा सिखाई। माँ-बाप के चरणों में ब्रह्मांड का वास बताया। इसलिए हमें राम नाम की पूजा करनी चाहिए।
2. माता के उस प्रेम को निःस्वार्थ, करुणामूर्ति, और ममता से परिपूर्ण बताया। माता के भाव में सिर्फ़ यश, समृद्धि, भाग्य और आकाश को छूने वाली ख्याति का उद्गम बताया। माता केकयी के त्याग और बलिदान को शब्दों में सीमित करना अन्याय होगा। राम के जन्म और लक्ष्य का सार केवल माता ही समझ सकती है। माता के अंतरज्ञान अपने पुत्रों के लिए अविस्मरणीय है, यह बताया राम ने। इसलिए हमें राम नाम के संस्कारों को पूजना चाहिए।
3. साधु, संतों, महात्माओं और ऋषियों के संरक्षण की प्रेरणा दी। हमारे ऋषियों के आविष्कारों और दिव्य ज्ञान से परिचय कराया। उनकी शिक्षा और चरणामृत से नकारात्मक और दुष्ट शक्तियों का विनाश किया। इसलिए हमें राम के गुरुभक्ति को पूजना चाहिए।
4. राम के जन्म का सबसे महत्वपूर्ण कारण बताना चाहूँगी। रावण का विनाश मुख्य उद्देश्य नहीं था। राम का जन्म तो उस देवी शबरी माता के निर्मल हाथों से जूठे बेर खाकर तृप्त होना था। माता के हाथों से पूरा स्वाद हासिल करना था। इसलिए राम की पूजा करनी चाहिए कि उन्होंने हर इंसान को गले लगाया। जातिवाद का झूठा प्रचार फैलाने वालों की नीयत गलत और स्वार्थपूर्ण है।
5. राम ने नदी पार करने के लिए केवट को चुना। उसे अपना परम मित्र बनाया और बदले में द्वापर युग में उसी सुदामा केवट को धन-धान्य देकर भवसागर पार कराया। इसलिए राम की पूजा करनी चाहिए कि वे हर किसी की निःस्वार्थ भावना के स्वयं भक्त बन जाते हैं। जाति और धर्म का मुखौटा पहनने वाले पहले राम के चरित्र को समझें।
6. निषादराज भील से उनकी मित्रता वर्णन के परे है। उनके लाए भोजन को स्वादिष्ट बताकर ग्रहण किया। समस्त भील समुदाय को अपने परिवार का सदस्य माना। सीता माता ने उनके बच्चों को अपना वात्सल्य दिया। हमें राम की पूजा इसलिए करनी चाहिए कि उन्होंने हर वर्ग और वर्ण के लोगों को अपनाया।
7. स्त्री की रक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए किसी भी दुष्कर और असंभव मार्ग से भी अपनी बुद्धि का उपयोग कर विजय प्राप्त की। ऐसे भेड़ियों का विध्वंस कर प्रवृत्ति रखने वालों को नष्ट किया। इसलिए हमें राम की पूजा करनी चाहिए कि उन्होंने स्त्री को सबसे अमूल्य धन बताया।
8. अपने से शक्तिशाली सेना और अस्त्र-शस्त्र वाले शत्रु से कैसे सामना करना है, यह बताया श्री राम ने। उन्होंने अपनी बुद्धि, प्रशासनिक क्षमता और प्रबंधन का पाठ पढ़ाया। हर परिस्थिति में अपने साथियों को नीति और शास्त्र के तर्कों से समझाया। विभीषण का राज्याभिषेक कर रावण की सेना को मानसिक रूप से कमजोर किया, जिससे उसकी सैन्य शक्ति तुच्छ हो गई। राम की पूजा इसलिए करनी चाहिए कि वे रणनीति, नीति, कुशल योजना और प्रशासन के आदर्श हैं।
9. त्याग और बलिदान से परिपूर्ण उन्होंने अपने अस्तित्व का सार सिखाया। लंकावासियों को एक कुशल, सक्षम, योग्य और प्रजा के प्रति समर्पित राजा प्रदान किया। लंका पर अपना अधिकार कभी नहीं समझा और ससम्मान उनका राज्य लौटाया। राम की पूजा इसलिए करनी चाहिए कि वे सबके लिए समान अधिकार के सृजनकर्ता थे और दूसरों को भी उनका हक देते थे।
10. श्री राम ने हमें धर्म की परिभाषा सिखाई। आज इसे तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। धर्म का अर्थ है वर्तमान स्थिति में कर्तव्य पालन, निष्ठा, नीति, और अधर्म एवं अन्याय के प्रति पूर्ण असहिष्णुता।
11. कठिन परिस्थितियों में हिम्मत रखना और जटिल समस्याओं का समाधान निकालना सिखाया। वानरों को सागर पार कराने की असंभव परिस्थिति को संभव किया। गहरे समुद्र में सेतु निर्माण कर स्त्री सम्मान के लिए राक्षसी प्रवृत्ति वालों का समूल नाश किया। हमें राम की पूजा इसलिए करनी चाहिए क्योंकि वे वास्तुशिल्प की उत्कृष्टता का आदर्श हैं।
समापन:
इस दिव्य क्षण में मैं अपने परिवार सहित अपने गाँव जाकर दीपक की रोशनी से प्रभु श्री राम का स्वागत करूँगी। राम की भक्ति और राम नाम की महिमा का वर्णन मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के लिए संभव नहीं। मैंने अपनी छोटी सी समझ से यह प्रयास किया है।
निवेदन:
आप सभी इसे पढ़ें और अपने परिवारजनों व सगे-संबंधियों के साथ साझा करें।
जय श्री राम।
डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव
हार्ट सर्जन
13 जनवरी, 2024
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