स्टॉकहोम सिंड्रोम क्या है?

# :

ये प्रहलाद आयंगर हैं. विश्व प्रख्यात MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) से "पीएचडी" कर रहे थे। वो भारत से वहां मरिक्का पढ़ने गए थे, परंतु वामुल्लों के नेटवर्क ने उनकी "केरल फाइल" बना दी... 

फिर इनको किरांती का कीड़ा काटा. लगे "पिलिसटीन का झंडा" उठा कर नाचने और लेख लिखने. प्रोटेस्ट करने.

आज कॉलेज ने इनको रेल (ओह सारी रस्टीकेट कर) दिया.. 

मतलब... खतम... टाटा.. बाय... बाय... 😆

अब आपको जिज्ञासा होगी कि लेख का टाइटल "स्टॉकहोम सिंड्रोम" क्यों है? 

जिन्हें नहीं पता हो, स्टॉकहोम सिंड्रोम एक ऐसी मनोदशा है, जिसमें विक्टिम (प्रताड़ित व्यक्ति) को अपने अत्याचारी या अत्याचारियों के समूह से "भावनात्मक लगाव" हो जाता है। और वह अपने ऊपर अत्याचार करने वाले के पक्ष में लड़ने के लिए तैयार हो जाता है।

प्रहलाद आयंगर कर्नाटक के उस मान्डयम ब्राह्मण कम्युनिटी से आता है; जिस समुदाय के लोगों ने पिछले 240 वर्षों से दीपावली मनाना छोड़ दिया है। 

जानते हैं क्यों?

तटुए और वामुल्लों द्वारा "मैसूर टाइगर" का खिताब पाए दुर्दांत "चिहा दी" टीपू सुल्तान ने नरक चतुर्दशी की रात (लक्ष्मी पूजा/दीपावली से एक दिन पहले) मेलकोट गांव में प्रहलाद अयंगर पूर्वजों को घेर कर 800 लोगों के सिर कटवा कर पूरे गांव में आग लगा दी थी। उस नरसंहार के शोक में आज भी मैसूर के उस क्षेत्र में दीपावली के दिन अंधकार पसरा रहता है। 

आयंगर ब्राह्मण समुदाय का अपराध था कि वो मैसूर के पूर्व हिंदू राजा कृष्णराज वाडयार 2 के वफादार थे। जब कृष्णराज जी का 1763 में देहांत हुआ तो सेनापति हैदर अली (टीपू का बाप) मैसूर की गद्दी पर कब्जा कर लिया. और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर बैठे आयंगर समाज के लोग रानी के वफादार बने रहे। उन्होंने अंग्रेजों से मदद मांगी.  

बताना आवश्यक है कि ये वही "टीपू टाइगर" था, जिसे उसके बाप हैदर अली के साथ #पेशवा_श्रीमंत_माधवराव की सेना ने बुरी तरह हराया था। हार का अंदाजा होते ही युद्धक्षेत्र से बाप बेटा दोनों भिखारी का भेष बना कर जान बचा कर भाग निकले थे।

विचार कीजिए... कैसे कोई अपने पूर्वजों के प्रति इतना कृतघ्न हो सकता है !! जिस अत्याचारी विचारधारा, DNA के लोगों ने प्रहलाद के पूर्वजों पर अकल्पनीय अत्याचार किया, आज वो उन्हीं का साथ दे रहा है?

वामपंथियों की ग्रूमिंग को हल्के में मत लीजिए.. वो आपके आस पास भी हैं.. वो आज भी #मास्क लगा कर स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, सोशल मीडिया ग्रुप्स, इत्यादि में आपके बच्चों के बीच अपना #मैनिफेस्टो लागू कर रहे हैं.

प्रहलाद की मनोदशा पर "बहुत काम" हुआ होगा, तभी वो स्टॉकहोम सिंड्रोम का शिकार हुआ है।

 नजर रखिए.. आपके बच्चों पर भी "काम" हो रहा है।

टिप्पणियाँ