पिछले कई वर्षों से जब भी मुफ्तखोरी पर लगाम लगाने की बात आती है, तो अक्सर बुद्धिमान लोग भी कहते हैं -



जनता मुफ्तखोर है, तो नेता को freebies देना (मुफ्तखोरी कराना) पड़ता है. अत: जनता दोषी हैं, हमारा "महामानव" नहीं.

नहीं भाई... अच्छे से समझ लीजिए. जनता नहीं,अपितु #राजा (नेता) ही दोषी है..!!

आप नेता हैं. नेता का मुख्य काम/पहचान ही "नेतृत्व" करना है। 

किस दिशा में अपने समर्थकों को लेकर चलना है - धर्म या अधर्म? 

अपने राज्य में प्रजा के बीच अनुशासन स्थापित करना किसका दायित्व है? प्रजा में बाल्यकाल से ही "सही और गलत का भेद" ( #धर्म_शिक्षा ) सिखाना किसका दायित्व है? 

राजा का ही ना? 

राज्य (राजा) ही तो शिक्षकों (गुरुओं) को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेगा। राज्य ही तो नीति (पाठ्यक्रम) निर्धारित करता है। 

बताइए - कौन तय करता है कि आपके बच्चों को "मैलाके का मैला" #पाठ्यक्रम में पढ़ाया जायेगा या नीतिशतक, पाराशर संहिता, भगवद्गीता और अष्टांग योग, इत्यादि...??

राज्य (राजा) ही ना?

तो जब भारत की पिछली चार पीढ़ी को #स्कूल में सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह (#लालच का त्याग), ब्रह्मचर्य, अस्तेय (किसी भी प्रकार की #चोरी मुफ्तखोरी ना करना), जैसी चरित्र निर्माण वाली बातें सिखाया ही नहीं गया, तो प्रजा में चरित्र की अपेक्षा कैसे?? 

लोग मुंह खोल कर कह देते हैं धर्माचार्य क्या कर रहे हैं? 😀

वैसे आप अपने बच्चों को स्कूल (कॉन्वेंट) भेजते हैं कि किसी गुरु के आश्रम में? मेरे अपने बच्चे सेंट्रल बोर्ड के स्कूल में ही पढ़े और मैं स्वयं भी स्टेट बोर्ड के सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई की है... हमने स्कूल में मैलाके का मैला हो पढ़ा है।🥺

 धर्मगुरुओं को अपशब्द कहने से पहले सोचिए और बताइए ना कि आप में से किसने अपने बच्चे को गुरुकुल/आश्रम में पढ़ने भेजा? कितने बार अपने बच्चों को लेकर किसी संत की शरण में गए हैं आप? 

अब आते हैं राज्य / राजा पर 👇

एक बात अच्छे समझिए - #प्रजा गायों या पशुओं (भैंसों, बकरियों, भेड़ों, इत्यादि) का झुंड है। और हर झुंड का मार्गदर्शन करने वाला #चरवाहा (नेता) तय करता है कि झुंड को किस दिशा में जाना है। किस मैदान में "चरना" है और किस "खेत" में नहीं चरना है. 

आपने देखा होगा कि प्रत्येक चरवाहे के हाथ में लाठी ( #कानून ) की शक्ति होती है।

गायों और पशुओं के झुंड में से जो भी इधर उधर भटकता है या गलत जगह मुंह मारता है, उसे "चरवाहा" अपनी लाठी का डर दिखा कर रोकता है।

तो भाई "Good Shepherd" (चरवाहा) जी आपके हाथ में 11 वर्ष से #लाठी है।

पशुओं के झुंड की भूख की आड़ लेकर खेत मत चरवा दीजिए.... मुफ्तखोरी पर लगाम लगाइए महाराज. ना मुफ्त में खिलाइए और ना ही खिलाने दीजिए..

बाकी लोग मुफ्तखोरी करवा रहे हैं तो मैं भी कराऊंगा.. अरे महाराज इसी लिए तो उनको लात मार कर आपको #गद्दी पर बैठाया है कि आप परिवर्तन लाएंगे... !! उन्ही की तरह कीचड़ में लोट कर सुअर का चरित्र दिखाने के लिए नहीं राज बनाया है। परिवर्तन लाइए... #परिवर्तन..!!

और प्रिय जनता !! आप भी जान लो. आज आप स्वार्थी राजनेताओं की कुटिलता में फंस कर अनुशासनहीन (#मुफ्तखोर) बने, तो आज तो कामचोरी कर के मुफ्त में थोड़ा कुछ खा लोगे; लेकिन कल भुखमरी की स्थिति आ जाएगी... 

देश कर्ज के बोझ तले डूब रहा/चुका है. देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

जागो... जागो.. जागो...🚩

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