सही मायने में हिंदू एकता सही रूप में कैसे स्थापित होगी ?

सत्यार्थ में हिंदू एकता उसी दिन पूर्णतः स्थापित होगी, जिस दिन हिंदू समाज का प्रत्येक व्यक्ति मित्र और शत्रु के बीच स्पष्ट अंतर को भलीभांति समझने में सक्षम होगा।

सत्यार्थ में हिंदू एकता उसी दिन वास्तविक स्वरूप धारण करेगी, जिस दिन हिंदू समाज सहस्र वर्षों के अपमान और अत्याचार का प्रतिशोध लेने हेतु दहक उठेगा।

सत्यार्थ में हिंदू एकता उसी दिन सिद्ध होगी, जिस दिन प्रत्येक हिंदू के हृदय में राष्ट्रीय चेतना प्रखर रूप से जागृत होगी।

सत्यार्थ में हिंदू एकता उसी दिन सुदृढ़ होगी, जिस दिन हिंदू समाज के भीतर सहस्र वर्षों तक सतत संघर्ष करने का धैर्य और संकल्प अडिग रहेगा।

सत्यार्थ में हिंदू एकता उसी दिन चरितार्थ होगी, जिस दिन प्रत्येक हिंदू के अंतःकरण में अखंड हिंदू राष्ट्र की चेतना जागृत होगी और अपने पवित्र भूभाग की पुनर्प्राप्ति हेतु आत्मोत्सर्ग का संकल्प प्रबल होगा।


अत्यधिक राजनीतिक चर्चाओं को हिंदू एकता का पर्याय मान लेना हमारी महती भ्रांति होगी। वास्तविक हिंदू एकता तभी संभव है, जब प्रत्येक हिंदू को अपने स्वधर्म का गूढ़ बोध हो तथा वह अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति पूर्णतः जागरूक हो।

हमें हिंदू समाज को इस प्रकार सशक्त, संगठित एवं जागरूक बनाना है, जैसा यहूदी समाज है—चाहे समस्त विश्व-व्यवस्था उनके विरोध में खड़ी हो जाए, फिर भी वे अपने लक्ष्य, संकल्प तथा राष्ट्र, समाज एवं परिवार की रक्षा हेतु सतत् संघर्षरत रहते हैं। हमें भी इसी दृढ़ संकल्प, अविचल आत्मविश्वास एवं अपराजेय ऊर्जा के साथ अग्रसर होना होगा।

हमारी यात्रा अभी अत्यंत विस्तृत एवं दीर्घगामी है। हमें असंख्य प्रयासों के साथ आगे बढ़ना होगा तथा आगामी सहस्र वर्षों की कार्ययोजना को मूर्तरूप देना होगा। 

पूर्ण विजय संकल्प हमारा अनथक अविरत साधना ।
निषिदिन प्रतिपल चलती आयी राष्ट्रधर्म आराधना ।
वंदे मातृभूमी वंदे वंदे जगजननी वंदे


✍️दीपक कुमार द्विवेदी

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