स्वतंत्रता की पहली चिंगारी: मंगल पांडे की वीर गाथा

दिनांक - 29 मार्च 1857
स्थान - बैरकपुर छावनी, 

उस दिन अमर बलिदानी वीर #मंगल_पांडेय जी के मन में विद्रोह की जो ज्वाला धधक रही थी, उसे याद करके हम ने भी आज का आधा दिन फायरिंग रेंज में अभ्यास करते हुए बिताया.

आसान नहीं है मंगल पांडे होना। कदाचित उस दिन मंगल पांडे के हृदय में भी यही विचार चल रहे होंगे - "सब चुप हैं तो क्या मैं भी अन्य लोगों का मुंह ताकता रहूं? रंगून से अंग्रेजी पलटन कलकत्ता पहुंच चुकी है। हिन्दुस्तानी सिपाहियों को निशस्त्र करने के आदेश आ चुके हैं। It's NOW or NEVER.... !! अभी नहीं तो कभी नहीं..!

सभी के जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं, जब हृदय कहता है - Enough is Enough. Not any more. I can't turn blind eyes on अन्याय & अधर्म !! 

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सन सत्तावन का विद्रोह हुआ,
 तारीख़ वही फिर आयी है।
याद करें उन सबको,
जिनने अपनी जान गँवाई है।

जो सजने थे सेहरों में, 
चढ़ अर्थी पर वो फूल गए।
कितने वीर जवानी में,
फाँसी पर हँसकर झूल गए।
भारत माँ के उन बेटों का,
व्यर्थ नहीं बलिदान रहे !!

हैं आतंकी कीड़े देखो, 
रोज रात को निकल रहे,
टुकड़े टुकड़े कर के देखो, 
कैसे सबको निगल रहे,
दहशतगर्दी फैल रही है, 
भारत माँ के सीने पर,
खुलेआम हैं दस्तक देते, 
धिक्कार है ऐसे जीवन पर!

अब भी जिसका खून ना खौला, 
खून नहीं वो पानी है। 
जो देश के काम ना आए, 
वो बेकार जवानी है।।

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मेरे युवा मित्रों आपके लिए मेरा संदेश सरल है - शास्त्र का अध्ययन अवश्य कीजिए। शास्त्रीय ज्ञान (धर्म) के बिना जीवन अधूरा है। लेकिन साथ ही #शस्त्र_विद्या भी अवश्य लीजिए. आत्मरक्षार्थ.

अंतिम बात - 
यद्यपि भगवान श्रीकृष्ण गीता के संदेश में कहते हैं - "अहिंसा परमो धर्म:" ; उन्होंने कहीं भी आत्मरक्षा हेतु #प्रतिहिंसा से रोका नहीं है। 

अपितु पूरी श्रीमदभगवत गीता का संदेश ही अर्जुन को अन्याय के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष हेतु प्रेरित करने के लिए ही कहा गया है.

धर्मो रक्षति रक्षित: 🚩

~~ African "हिन्दुस्तानी" ✍️

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