राणा संग्राम सिंह राणा सांगा के बारे आइए जानें विस्तार से

राणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) :

मेवाड़ की माटी में जन्मे शूरवीरों में सबसे सफल योद्धाओं में यशस्वी बप्पा रावल, राणा कुम्भा के समकक्ष अगर कोई अन्य रणजी खड़े होते है, तो वो हैं #राणा_सांगा .

रणभूमि में सफलता, अपने राज्य के साम्राज्य विस्तार, मुस्लिम सुलतानों पर विजय और हिंदुओं की रक्षा के मामले में वे अपने पोते #महाराणा_प्रताप से मीलों आगे थे। परंतु राणा सांगा जी के प्रति जनजागृति के आभाव में उन्हें वो गौरव प्राप्त नहीं हुआ।

इस्लामिक आक्रमणकारियों के समक्ष राणा सांगा ने कदाचित सबसे कठिन और सफल युद्धों का संचालन किया। जिन छोटे बड़े 100 युद्धों में अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व किया था राणा जी ने, उनमें से 18 युद्ध बहुत ही खूनी और गेम चेंजर थे। 

1000 वर्ष के सिसोदिया वंश के शासन काल में कदाचित #सांगा के जीवनकाल में राज्य का विस्तार सबसे अधिक था। केवल तुलना के लिए बताना चाहूंगा कि आज की पीढ़ी महाराणा प्रताप को सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ योद्धा के रूप पूजती है, उनका राज्य आज के चार पांच जिलों में ही सीमित था, जिसमें से एक जिला #चित्तौड़ महाराणा प्रताप आजीवन नहीं जीत (स्वतंत्र करा) पाए थे.

तुलनात्मक रूप से राणा सांगा जी ने मालवा के सुल्तान को हराया, दिल्ली के लोधी को हराया, गुजरात के सुल्तान को हराया, राजपुताने के लगभग सभी अन्य रियासतों को हरा या समझा कर एक किया था। सांगा जी के राज्य का विस्तार पूरा राजस्थान, आधा मध्यप्रदेश, पूरा गुजरात, आधा हरियाणा और दिल्ली की सीमा तक पहुंचा दिया था।

राणा सांगा ने स्वतंत्र कराए हुए मालवा, गुजरात इत्यादि में हिंदुओं को #जजिया से मुक्ति दिलाई थी। 

सबसे बड़ी बात कि ये कदाचित ऐसे विलक्षण योद्धा थे जिनके शरीर पर 80 घाव गिने जा सकते थे। अग्रिम पंक्ति में सिपाहियों के साथ कंधा से कंधा मिला कर लड़ने वाले सांगा ने एक आंख और एक हाथ खोने के बाद भी युद्ध लड़ना नहीं छोड़ा। 

वामुल्ले #च्युतिहास्यकार कहते हैं कि राणा सांगा ने बाबर को चिट्ठी लिख कर लोधी से लड़ने के लिए मदद मांगी थी!!

आप स्वयं विचार कीजिए - जिस योद्धा ने हिंदुओं को जजिया के अत्याचारी टैक्स और मंदिरों की रक्षा हेतु दिल्ली के लोधी, गुजरात के सुल्तान, मालवा के सुल्तान को कई कई बार हराया हो, वो एक और टटूआ #बाबर की सहायता मांगेगा?

और फिर उसी बाबर/हुमायूं से #खानवा में लड़ने भी चले जायेंगे? और फिर उनके देहांत के कुछ वर्षों बाद राणा जी की वीरांगना धर्मपत्नी #महारानी_कर्णावती जी अपने पति के देहांत के जिम्मेदार म्लेच्छ हुमायूं को राखी भेजेंगी?

हिंदुओं का दुर्भाग्य है कि - बाबर के समक्ष युद्ध में हिंदुओं की सेना तलवार और भाला ले कर लड़ रही थी, जबकि बाबर #बारूद और तोपें लेकर लड़ने आया था। जिससे वह हिंदुओं की सेना पर आधा किलोमीटर दूर से तोप के गोले बरसा पाता था, जबकि हिंदू सैनिक (Hand to Hand Combat) में ही शत्रु को नुकसान कर पाती थी. 

हमारी जानकारी में खान्वा का युद्ध अनिर्णीत रहा था। दोनों पक्ष की सेनाएं भारी नुकसान उठा कर पीछे हट गई थीं। परंतु हिंदुओं की क्षति अपूरणीय थी। #उन्नत_हथियारों (टेक्नोलॉजी)के बल पर बाबर अंततः सफल रहा। 

उन्नत बंदूकें और तोपखाना ने ही खानवा से लेकर पानीपत तक हुए सैकड़ों युद्धों में "इस्लामिक आक्रांताओं" की सफलता में सबसे अहम भूमिका निभाई है!!
 
इतिहासकारो और राजनेताओं का प्रथम दायित्व है कि वे अपने राष्ट्र पुरुषों, सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्र गौरव का मान बनाए रखें. इतिहास के साथ छेड़ छाड़ ना करें और ना ही होने देवें.परंतु आज राजनीतिक दलों में अध्ययनशील और आत्मगौरव वाले लोगों का घोर आभाव हो चला है। 

मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जो #मूर्ख मानते हैं कि राणा सांगा ने चिट्ठी लिख बाबर को बुलाया था, उन्हें राणा जी का पूरा नाम तक नहीं पता होगा। 

क्या आपको उनका पूरा नाम पता था?

अस्तु हमारा दायित्व :
विदेशियों से देश की रक्षा हेतु युद्ध में अपने शरीर पर 80 घाव खाने वाले खानवा युद्ध के नायक #राणा_सांगा का अपमान करने वाले नीच दुष्टों को जूता सूंघाना आवश्यक है। वर्तमान पीढ़ी के बीच अपने इतिहासवीरों के प्रति जन जागृति लाना होगा। साइंस पढ़ने वाले बच्चों को भी सही इतिहास पढ़ाना ही होगा।

जय एकलिंग महादेव 🚩 
हर हर महादेव 🚩 
जय श्रीराम 🚩 

~~ बाजीराव बल्लाळ ✍️

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