इस्लामी जिहादी मानसिकता के उन्मूलन हेतु शासन एवं समाज द्वारा किए जाने योग्य ठोस उपाय


भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक अखंडता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु इस्लामी जिहादी मानसिकता का उन्मूलन अत्यंत आवश्यक है। यह समस्या केवल धार्मिक नहीं, अपितु एक राजनीतिक, जनसंख्या-संबंधी, आर्थिक एवं वैचारिक षड्यंत्र का परिणाम है। अतः शासन एवं समाज को निम्नलिखित ठोस एवं व्यवस्थित उपाय अपनाने होंगे।

1. इस्लामी विशेषाधिकारों की समाप्ति

संविधान के समानता के सिद्धांत के अनुरूप किसी भी मजहब को विशेषाधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। मुस्लिम समुदाय को दी जाने वाली हज सब्सिडी, धार्मिक अनुदान, विशेष आरक्षण, एवं अन्य लाभों को समाप्त करना आवश्यक है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

भारत में मुस्लिम समुदाय को प्रतिवर्ष अरबों रुपये की अनुदान सहायता मिलती है, जबकि हिंदू समाज को अपने धार्मिक स्थलों एवं गतिविधियों के लिए कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता।

हज सब्सिडी समाप्त करने के बाद भी सरकार वक्फ बोर्डों को भारी वित्तीय सहायता देती है।

भारत में 5 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनका मूल्य 15 लाख करोड़ से अधिक है, फिर भी सरकारी धन पर निर्भरता क्यों?
✅ समाधान:

मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को मिलने वाली सरकारी सहायता को पूर्णतः समाप्त किया जाए।

सरकारी सहायता का उपयोग केवल आदिवासियों, निर्धनों एवं पिछड़े वर्गों के लिए किया जाए, न कि किसी विशेष मजहब के लिए।

2. अल्पसंख्यक दर्जे की समाप्ति एवं समान नागरिक संहिता

भारत में मुस्लिम जनसंख्या 1947 में 9.8% थी, जो अब 17% से अधिक हो चुकी है, फिर भी उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है।
✅ समाधान:

मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का विशेषाधिकार समाप्त कर समान नागरिक बनाया जाए।

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू कर बहुपत्नी प्रथा, तीन तलाक, हलाला, शरिया कानून एवं अन्य असमान प्रथाओं को समाप्त किया जाए।

3. मजहबी शिक्षा पर प्रतिबंध एवं आधुनिक शिक्षा प्रणाली

भारत में 1.5 लाख से अधिक मदरसे संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी निगरानी से मुक्त हैं एवं जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

पाकिस्तान के 70% आतंकवादी मदरसों से जुड़े होते हैं।

भारत में 2001 से 2022 तक आतंकवाद से जुड़े 95% अभियुक्त किसी न किसी मदरसे से संबद्ध रहे हैं।
✅ समाधान:

सभी मदरसों को सरकारी निगरानी में लाया जाए एवं इनका वित्तीय एवं पाठ्यक्रम अंकेक्षण (Audit) अनिवार्य किया जाए।

मदरसा शिक्षा के स्थान पर आधुनिक, वैज्ञानिक एवं राष्ट्रवादी शिक्षा लागू की जाए।

अरबी, उर्दू एवं इस्लामी कट्टरपंथी साहित्य पर प्रतिबंध लगे।

4. जिहादी वित्तीय तंत्र पर कठोर नियंत्रण

भारत में हर वर्ष अरबों रुपये की इस्लामी फंडिंग खाड़ी देशों से आती है, जिसका उपयोग धर्मांतरण एवं जिहादी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

2017 से 2023 के बीच 5000 करोड़ रुपये की संदिग्ध फंडिंग पकड़ी गई।

PFI, SIMI, Tablighi Jamaat जैसी संस्थाओं को खाड़ी देशों एवं पाकिस्तान से वित्तीय सहयोग प्राप्त होता है।
✅ समाधान:

सभी इस्लामी संस्थाओं एवं मस्जिदों की आय-व्यय का अनिवार्य अंकेक्षण (Audit) किया जाए।

विदेशों से आने वाले इस्लामी अनुदानों पर कठोर प्रतिबंध लगाया जाए।

इस्लामिक बैंकिंग एवं हलाल इकोनॉमी की जाँच की जाए।

5. जनसंख्या नीति: भारत में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन का समाधान

जनसंख्या नीति: भारत में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन का समाधान

भारत में जनसंख्या वृद्धि मात्र एक सामाजिक या आर्थिक विषय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। विशेष रूप से हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या असंतुलन देश की लोकतांत्रिक संरचना, सांस्कृतिक स्थायित्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

(क) ऐतिहासिक एवं वर्तमान आँकड़े

भारत में जनसंख्या असंतुलन बीते सात दशकों में निरंतर बढ़ता गया है।

(*अनुमानित आँकड़े)

➤ कुछ राज्यों में मुस्लिम जनसंख्या इतनी बढ़ चुकी है कि वहाँ हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं।
➤ बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की बढ़ती संख्या जनसंख्या असंतुलन को और अधिक भयावह बना रही है।

(ख) हिंदू-मुस्लिम प्रजनन दर में अंतर

➤ हिंदू समुदाय की प्रजनन दर 2.1 से नीचे गिर चुकी है, जो जनसंख्या स्थिरता के लिए आवश्यक न्यूनतम स्तर से भी कम है।
➤ मुस्लिम समुदाय में अधिक जन्मदर के कारण जनसंख्या असंतुलन और अधिक बढ़ता जा रहा है।

(ग) मुस्लिम बहुल होते जिले एवं राजनीतिक प्रभाव

पश्चिम बंगाल, केरल, असम, उत्तर प्रदेश एवं बिहार के कई जिलों में मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके हैं।

लोकतंत्र में वोट बैंक की राजनीति इस असंतुलन को और अधिक बढ़ावा दे रही है।

मुस्लिम बहुल होते क्षेत्रों में शरिया कानून, मजहबी कट्टरता एवं हिंदू पलायन की घटनाएँ बढ़ी हैं।

2. ✅ समाधान: भारत के लिए ठोस जनसंख्या नीति

(क) धार्मिक आधार पर संतुलित जनसंख्या नीति

✅ "2 संतान नीति" समाधान नहीं है, क्योंकि इससे केवल हिंदू समुदाय की जनसंख्या घटेगी, मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
✅ जनसंख्या नीति ऐसी होनी चाहिए कि हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या संतुलन बना रहे।

(ख) समान प्रजनन दर (Equal Fertility Rate) नीति

✅ सभी मजहबों के लिए प्रजनन दर 2.1 के भीतर सीमित हो।
✅ तीसरी संतान पर सरकारी सुविधाएँ समाप्त कर दी जाएँ।
✅ अल्पसंख्यक दर्जे एवं आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं को मिले, जो जनसंख्या नियंत्रण नियमों का पालन करें।

(ग) अवैध घुसपैठियों का निष्कासन एवं NRC (National Register of Citizens) लागू करना

✅ पूरे भारत में NRC लागू किया जाए, जिससे अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची से हटाया जा सके।
✅ बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को देश से निष्कासित किया जाए।

(घ) “तीसरी संतान कर” एवं सरकारी सुविधाओं में कटौती

✅ मुस्लिम समाज में तीसरी संतान होने पर सरकारी सुविधाएँ (राशन, सब्सिडी, आरक्षण आदि) समाप्त की जाएँ।
✅ तीसरी संतान पर विशेष जनसंख्या कर (Population Tax) लागू किया जाए।
✅ सरकारी नौकरी एवं चुनाव लड़ने की पात्रता केवल उन्हीं को मिले, जो जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन करें।

(ङ) बहु-पत्नी प्रथा और मजहबी जनसंख्या वृद्धि रणनीति पर रोक

✅ बहु-पत्नी प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
✅ इस्लामी मजहबी जनसंख्या वृद्धि योजनाओं पर अंकुश लगाया जाए।
✅ लव जिहाद और मतांतरण के माध्यम से जनसंख्या बढ़ाने के षड्यंत्रों को रोका जाए।

(च) हिंदू समुदाय के लिए जनसंख्या प्रोत्साहन योजना

✅ हिंदू समाज में प्रजनन दर (TFR) को पुनः 2.1 से ऊपर लाने हेतु प्रोत्साहन योजनाएँ लागू की जाएँ।
✅ तीसरी संतान के लिए हिंदू परिवारों को विशेष वित्तीय सहायता दी जाए।
✅ जिन जिलों में हिंदू जनसंख्या 50% से कम हो रही है, वहाँ हिंदू पुनर्वास कार्यक्रम लागू किया जाए।

3. निष्कर्ष: जनसंख्या संतुलन, राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार

✅ दो-संतान नीति समाधान नहीं है, क्योंकि यह केवल हिंदुओं की जनसंख्या को नियंत्रित करेगी, जबकि मुस्लिमों पर किसी प्रकार का जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू कर पाना असंभव है, क्योंकि उन्हें शासकीय सेवाओं की आवश्यकता नहीं होती। जनसंख्या संतुलन बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता एवं लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए परम आवश्यक है।

✅ हमें ऐसी नीति अपनानी होगी, जो मजहबी असंतुलन को रोके और हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या संतुलन को सुनिश्चित करे।
✅ जनसंख्या संतुलन को बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता एवं लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

यदि अब भी हम नहीं चेते, तो आने वाले दशकों में भारत की सांस्कृतिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय अखंडता खतरे में पड़ सकती है। अतः हमें अब ही कठोर और न्यायसंगत जनसंख्या नीति को लागू करना होगा।

6. हिंदू आत्मरक्षा नीति एवं शस्त्र प्रशिक्षण

हिंदू समाज को संगठित कर आत्मरक्षा हेतु प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
✅ समाधान:

हिंदू युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाए।

हिंदू बस्तियों में "सुरक्षा समिति" बनाई जाए, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में आत्मरक्षा कर सके।

हिंदू समाज को अपने हितों की रक्षा हेतु संगठित किया जाए।

7. आतंकवाद एवं इस्लामी कट्टरता पर कठोर दंड नीति

भारत में 1990 के बाद 35,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें 50,000 से अधिक नागरिक मारे गए।
✅ समाधान:

आतंकवाद, लव जिहाद, धर्मांतरण एवं जिहादी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कठोर दंड दिया जाए।

PFI, SIMI, Tablighi Jamaat जैसी इस्लामी संगठनों को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए।

कट्टरपंथी मौलवियों एवं धर्मगुरुओं की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए।

8. हिंदू आर्थिक तंत्र (Hindu Economic System) का निर्माण

हलाल अर्थव्यवस्था एवं इस्लामी बैंकिंग हिंदू व्यापारियों के आर्थिक शोषण का माध्यम बन चुके हैं।
✅ समाधान:

हिंदू व्यापारियों को "हलाल इकोनॉमी" के बहिष्कार हेतु जागरूक किया जाए।

स्वदेशी एवं हिंदू उद्यमों को बढ़ावा देने हेतु संगठित आर्थिक प्रणाली विकसित की जाए।

9. मुस्लिम समाज के अंतर्विरोधों का उद्घाटन

इस्लाम में 72 फिरके हैं, जिनमें आपसी संघर्ष व्याप्त है।
✅ समाधान:

अशराफ बनाम अजलाफ, शिया बनाम सुन्नी संघर्षों को उजागर कर कट्टरता को कमजोर किया जाए।

मूल भारतीय मुसलमानों को भारतीय संस्कृति से पुनः जोड़ने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

10. "सद्गुण विकृति" का त्याग एवं कठोर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण

✅ समाधान:

सरकार को इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध कठोरतम दंड नीति अपनानी चाहिए।

हिंदू समाज को आत्मरक्षा हेतु सशक्त एवं संगठित होने की प्रेरणा दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष - 2000 साल पहले एक यहूदी बढ़ई ने कहा था सत्य आपको मुक्ति दिलाएगा यह स्वयंसिद्ध सत्य है आज से अधिक प्रासंगिक कभी नहीं रहा है आईए हम इस्लाम की गंदी सच्चाई लोगों बताए आईए हम सत्य को एक अवसर दे

✍️ दीपक कुमार द्विवेदी ( बाल योगी )

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