1946 में एक पत्रकार तैयब जी के पास गया और उसने पकिस्तान की प्रासंगिकता पर उनकी राय जननी चाही तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुस्लिम लीग के चंद अभिजात्य लोगों को लगता है कि उनकी पादशाही खतरे में हैं। उन्हें आम मुसलमानों से धेला भर नही लेना है वह उनका उपयोग केवल स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। यह संगठन अपने कुप्रचार के बल पर हिटलर की भांति मुसलमानों को शिविर में समेट रही है। जिसका अंत मुसोलिनी और नाजियों जैसा ही होगा। डॉ अम्बेडकर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मुसलमान यह नहीं समझते कि जिन्ना उन लोगों का कितना बड़ा नुकसान और अपकार कर रहे हैं। मुस्लिम लीग केवल कुछ लोगों के हित पूरी करने में लगी है।
जुलाई 1947 में देश जल रहा था। जिन्ना इम्पीरियल होटल में रुका हुआ था वहाँ पर क्रुद्ध मुसलमानों की एक टीम ने उस पर आक्रमण कर दिया। अब्दुल सत्तार सेठ जैसे लोगों ने जिन्ना को कौम का गद्दार घोषित कर दिया पर तब तक अशरफी मुसलमानों ने अपने वर्ग हित को वतन से जोड़ कर पकिस्तान का सपना बेंच चुके थे। अजलाफ वालों को अभी तक जिन्ना के इस पाप का नरक भोगना पड़ रहा है। अजलाफ हमेशा अजलाफ बने रहें ऐयाशों हमेशा इस बात की कोशिश की।
खाए पिए अघाए मुसलमानों का तबका है जिनका किचन और बैंक दोनों ओवेरफ्लो हैं, जो हमेशा दीन को आगे कर अजलाफों के कंधे पर बन्दूक रख कर चलाता है। एक साक्षात्कार मै देख रहा था जिसमें गरीब मुसलमानों की जाहिलियत और बर्बादी के जिम्मेदार अशराफों से सवाल पूछने पर उसकी नेता तथाकथित पत्रकार अरफा खानुम साक्षात्कार छोड़ कर चली गयी। यह खानुम नही बल्कि वे ऐयाश मुसलमानों के प्रतिनिधि हैं जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अपने ही भाइयों के घर जला दिए, देश का बंटवारा कर दिया और आज भी देश को बांटने में लगे हैं। पाकिस्तान के हाथ भीख का कटोरा है, आने वाले समय में वह बचेगा इसकी उम्मीद न के बराबर है, ये लोग जिन्होंने पाकिस्तान बना के मजे लूटे। ऐयाशी की, सबने लंदन दुबई आदि जगहों पर अपने बिजनेस और घर बना रखे हैं, मरेगा गरीब मुसलमान क्योंकि गैर मुसलमानों के लिए भारत का रास्ता खुला है बाकी जिन्ना ने सब रास्ते बंद कर दिए थे और जिन्नावादी सोच अब भी वही दरवाजे बंद करने का काम कर रही है।
इसलिए समझदार लोग अपने अल्पसंख्यक तमगे को हटा कर सनातन दृष्टिकोण अपना रहे क्योंकि वे देख रहे कि धर्म के नाम पर उन्हें अकेला मरने को छोड़ा जा रहा है। भारत में ऐयाश लोगों द्वारा कई मिनी पाकिस्तान कंसेप्ट विकसित कर जिन्ना वाला मॉडल बनाया गया है जिससे तमाम मुसलमान उकता गये हैं। ऐयाश मुसलमान कभी सी ए ए के नाम पर, कभी तीन तलाक़ के नाम पर, कभी हिजाब के नाम पर एक बड़े तबके को आंदोलित किये रहते हैं ताकि संसाधनों की मलाई वे अकेले चांपते रहें।
अज़ालफों को यह समझना पड़ेगा कि उनकी जाहिलियत की कीमत पर पाकिस्तान बना, फायदा किसे मिला? उनकी ज़ाहिलियत को बरकरार रखने के तमाम हथकंडे अशरफी लोगों द्वारा किये जा रहे हैं, जैसा कि जिन्ना ने किया था, खुद तो शराब पीता था पर धर्म के नाम पर लोगों को उकसाता रहता था।
अरफा खानुम को हमेशा किसने हिजाब में देखा? किसी ने नहीं पर वह निम्न वर्ग के मुसलमान बच्चियों को हिजाब में रखने की पुरजोर वकालत करती है, यह अमीर अय्याश मुसलमानों की पाकिस्तान इंस्टिंक्ट है।
अजलाफियों को यह साजिश समझनी होगी और उन्हें अपने आईकॉन बदलने होंगे अन्यथा तमाम पीढियाँ गुलामी और गुरबत में ही बीतेंगी यह सुनिश्चित है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें